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श्रम मजदूर दिवस की बधाइयां अधिकतरों बैंकों ने खूब प्रचारित की,लेकिन जब वेतनभोगी को ही परेशानी होती हो तो दिहाड़ी मजदूरी करने वाले को कैसे मिले

सरकारी निजी संस्थान-संस्थाएं आमजन को राहत देने के दावे तो बहुतरे करते हैं,लेकिन हकीकत में ये दावे राहत के आसपास भी नहीं फटक पाते। विशेष तौर पर हाल में गए श्रम मजदूर दिवस की बधाइयां अधिकतरों बैंकों ने खूब प्रचारित की,लेकिन जब वेतनभोगी को ही परेशानी होती हो तो दिहाड़ी मजदूरी करने वाले को कैसे बैंक जल्द से व्यक्तिगत लोन ऋण दे देते होंगे ये जानकारियां उजागर नहीं हो पाती ? किसी भी क्षेत्र के बारे में बातें हो जाए,सब में झूठ मक्कारी का गड़बड़झाला व्यवस्थाओं को बिगाड़ने का काम ही करता नजर आता ? सीधे तरीके और सच्चाई के दम पर मुश्किल से एक आध फीसदी लोग ही स्वयं का कार्य संपन्न करवाते पाते लगते हैं,बाकी तो ले देकर जैसे तैसे कार्य करने कराने का जतन सत्य-ईमानदारी को ठेंगा दिखाता रहता ? बैंकिंग सेक्टर आजकल हर किसी की आवश्यकता बन चुका और ये क्षेत्र तो ऐसा की कोई स्वयं खाता खुलवाने का फ़ार्म भी भरते भरते दूजे की मदद लेने को मजबूर हो जाता है। पेपरलैस बैंकिंग कार्य को बढ़ावा देने का अभियान चलता है,लेकिन एक खाता खुलवाने के फार्म के बेमतलब के अंग्रेजी से परिपूर्ण पन्नों को कम करने का कार्य ह...