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Showing posts from July, 2017

शाह श्री के दौरे का सार, बरसात का भरा पानी और रोज की लूट पर नहीं कोई अंकुश ?

शाह श्री के दौरे का सार, बरसात का भरा पानी और रोज की लूट पर नहीं कोई अंकुश ? कार्यकर्ता ना होना निराश। जनता कार्यकर्ताओं को ना कहे क्योंकि संगठन अभी मजबूत करना है। चाहे अगले चुनाव में सत्ता से ही बाहर पटक देना ? संगठन मजबूत करके सत्ता फिर से पाने का पावर गेम चल रहा है, ऐसे में सरकार को कुछ कह नहीं सकते। धर्म-जात-अगड़ा पिछड़ा बाबाओं संग बंद कमरों में वार्तालाप, खाना पीना के शोर भले ही खबरचियों ने चीख चीखकर नॉनस्टॉप दिखाए होंगे, लेकिन बरसात के पानी में तैर रही जनता की पीड़ाएं-समस्याएं दब भी नहीं पाई। माननीय नेताजी ने संगठन को ऐसा मजबूत करने का मंत्र दिया की बैठक में आये एक जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंच गए ? माननीय शाह श्री किसी गरीब के घर खाने पर तो पहुंच गए पर सत्ता तलक पहुंचाने वाली माई बाप जनता के घरों में आसपास भरे पानी को देख पाने की फुरसत नहीं निकाल पाए। माननीय के दौरे के साथ शुरू हुआ बरसात आने का क्रम भी नहीं टूटा और ना ही सड़कों गली मोहल्लों में पानी भरने का चलन रुका। अपराधी भी ठेंगा जैसे निकाले ही घूम रहें हैं,जो साहेब के दौरे में व्यस्त प्रशासन को आज भी चुनौत...

अमित शाह का स्वागत लील गया जनता की परेशानी

अमित शाह हमारे राजस्थान की राजधानी में पधारे, पर क्या करने वो इतनी दूर से हवाई जहाज से उतरे वो पत्ते अभी तलक किसी ने पट्ठे ने नहीं उघाड़े हैं।  बड़ी बड़ी खबरें समाचार छन छन कर रहे हैं शाह सत्ता संगठन को मजबूती देंगे पर जहां एक तरफ भाजपाई संगठन और सरकार शाह को लुभाने में लगे रहें, वहीं दूजी तरफ अपराधी कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर बड़ी बैंक लूटों को बेखौफ अंजाम दे गए।  हाल में राजस्थान पुलिस सबसे तेज का दावा दो तीन की अजमेर-जैपुर की वारदातों से मंदिम सा हो गया।  ये भी संजोग जोरदा र रहा की शाह के दौरे के शुरुआत में ही प्रशासनिक कार्यों की खुल्ल्म खुल्ला पोल हर स्तर पर उधड़ी, ऐसे में शाह का कोई सार्वजनिक बयान सत्ता संगठन को फटकारने दुत्कारने का नहीं आना जनता की बदकिस्मती हो रहा। अभी भी कुछ नहीं बदला, अगर अमित शाह अपने स्वागत मालाओं तले दबे चक्षुओं को उभारें तो जनता के बुरे हाल उनको साफ़ साफ़ नजर आ जाएं। ज्यादा दूर नहीं जाना ना ही पैदल चलना बस जिस वाहन में विराजे हैं उसी से थोड़ा बाहर झांक लें दिल्ली से आये मेहमान तो सड़कों पर बहता पानी गंदगी नजर आ जायेगी। कानून व्यवस्था की खामी तो ...

रामायण पढ़ा दी महाभारत करा दी फिर भी नहीं निकला समाधान

रामायण पढ़ा दी  महाभारत करा दी  फिर भी नहीं निकला समाधान  गीता की पुस्तकें भेंट करते करते खुद भी भूले और दूजे को भी नहीं मिला ज्ञान  गांधीजी को याद कर अहिंसा की बातें कर ली नहीं बनी बात / भगतसिंह-चंद्रशेखर आजाद तलक के बलिदान को भी लिया साथ फिर भी सामने वाले ने नहीं मानी बात / दूजों के घोटाले उजागर करने के फेर में खुद का घर साफ़ करने तक की नोबत आ गई / ईमानदारी की कसमें खाते खाते खुद पर बेईमानी का ठप्पा लगा बेठे / झूठ से नफरत नफरत हे कह कह कर सबसे बड़े झूठे बन बैठे/ दूजों को नाकारा बताते बताते खुद ही नालायक बनने का रास्ता चुनने लगे / दूजों के घरों में आग लगाने वाले आजकल खुद के घर को टूटने से बचाने में लगे हें / मोह माया से दूर रहने की नसीहत देने वाले खुद की सत्ता बचाने में जुटे / भ्रष्टाचार मिटाने का दावा करने वाले ही खुद पर गिरी चिंगारीयों से अब डरने लगे हें / वर्तमान हालातों से बुरे हालात तो कभी नहीं रहे पर इन्हें लिखते लिखते अब तो मेरे हाथों की अंगुलियां भी थकने लगी हें फिर भी कहीं ना कहीं सारी समस्याओं के समाधान की उम्मीदें अभी भी जिन्दा हे

बरस जा अब तो बरस जा । इतना मत तरसा-तडपा

बरस जा अब तो बरस जा । इतना मत तरसा-तडपा।  अब तो बरस जा का हल्ला सुन इन्द्रदेव भी अध्यधिक विचलित होकर कहाँ बरसे की सोच में पड़े । ये देख इंद्र के चेले चपाटी भी धरती वालों का पूरा बायोडाटा खंगालने लगे । इंद्र के थोड़ा सा बरसते ही चेले चपाटी उनको रोक कर बोलते राजन क्यों इन मक्कारों के लिए अपनी उर्जा व्यर्थ में बहाते हो । एक तो सभ्य कहलाना पसंद करने वाले को आपसे बात करनी की तमीज नहीं और दिखावा करने में भी करता हे यकीन । इंद्र अब ज्यादा परेशान हो के सोचने लगे तो उनकी मंडली इंसानी फितरत का ढोल पीटने लगी । राजन माना की धरतीपुत्र जल संकट से जूझ रहा हे पर उसकी गलती का बोझ हम क्यों उठाये । हमने तो कभी भी अपने कर्तव्य से मुहं नहीं मोड़ा । ये तो इंसान हे जो सब उजाड़ अपनी वाणी की मधुरता भी खो बेठा अब आपको आवाज देता हे वो भी देखो केसे अब तो बरस जा। अरे सीधा कह दे इंसान अब तो बरसता रहे तो क्या गलत होता । ये तो घर घर आये मेहमान को बेठाए बिना उसको विदाई देने समान बोली हे। अब इसमें इन्द्रदेव आप की क्या गलती जेसा इंसान चाहता हे वेसा ही करते हो। उसने बोला अब तो बरस जा और आप बरस कर चलते बने । अब इंसान करे...

राम रूठा राज रूठा तो लोगों का दिल टूटा?

राम रूठा राज रूठा तो लोगों का दिल टूटा? घायल अस्पताल से छुट्टी की बाट जोहे, मरने वाला अंतिम संस्कार को तरसे। इतना कुछ होने पर भी हर कोई अपनी अपनी रोटियां आजकल राजस्थान में सेंकने की जुगत में व्यस्त।  घर में शव रखा है, परिजनों समर्थकों का हाल बेहाल है एक तरफ तो दूजी तरफ घायल के स्वस्थ होने की प्राथनाएं जोरों पर।  न्याय-अन्याय के घालमेल के शब्द बाणों और मामला सुलटाकर नंबर बढ़ाने के कारनामों से मरने वाले और जिंदा दोनों को शर्मशार करने के काम करने से भी कुछ लोग बाज नहीं आ रहे ? मृ तक के लिए दिलों दिमाग से न्याय मांगने के लिए लोग स्वतः ही आगे बढ़ने लगे तो अब प्रायोजित कार्यक्रमों से कुछ लोग भीड़ आगामी दिनों में जुटाने के जुगाड़ में जुटे। सामाजिक विवशता ऐसी है की सच्चे लोगों के एक तरफ खाई तो दूजी तरफ कुआं जैसी विकट संकट वाली परेशानी सामने आई। हाल के घटनाक्रमों से हिंदुत्व का दावा फैलाने वालों की कार्यशैली पर कालिख सी पुती हुई है। अंतिम संस्कार को तरसती लाश और फिर राजनैतिक कलाबाजियां धर्म संस्कार संस्कृति का काल बनती नजर इन दिनों राजस्थान में नजर आती है।

आनंदपाल मामले में राजस्थान का मीडिया गाय बना ?

आजाद देश में रट्टू तोते से भी बदतर गुलामी भरे विचारों की मानसिकता लिए मन में आये उसके गुणगाण-लानतें तत्काल देने से हम बाज नहीं आते ? कोई किस आधार पर क्यों कैसे किसलिए कहता है और कहने वाला कैसा है ये जाने बुझे बताये बिन उसे हीरो या जीरो बनाने की चर्चाओं का बेमतलब दौर भी हमारे यहां खूब चलता है ? ऐसे दौर में मिडिया की हालत तो दुधारू गाय जैसी हो गई है की जब तलक उसका दूध मिलता रहे वो बड़ी अच्छी लगती है, नहीं दूध दे तो हर कोई थाप लगाता हुआ उसे दुत्कारता नजर आता है। हाल ही में राजस्थान की सारी बड़ी बातों यादों पर भारी पड़ रहे आनंदसिंह एनकाउंटर मामले पर उठ रहे सवालों के बीच भी मिडिया की भूमिका पर सवाल उठने लगे ? मिडिया की गलती इतनी सी रही की पुराने आंदोलनों में क्या क्या हुआ करने वाला कौन इसे इग्नोर अनदेखा करते हुए उक्त आंदोलनों में सर्वेसर्वा बने लोगों की हालिया आंदोलन के बारे में बातें उजागर कर दी। वीडियो बातें सार्वजनिक होते ही बेचारी मीडिया के पीछे लानतों की बौछारें लगा दी गई। माना की जख्म कईयों के तन मन को अशांत सा कर गया है, लेकिन कुछ तो सच होगा जो बार बार इन्हीं लोगों पर सवा...