रामायण पढ़ा दी महाभारत करा दी फिर भी नहीं निकला समाधान
रामायण पढ़ा दी
महाभारत करा दी
फिर भी नहीं निकला समाधान
गीता की पुस्तकें भेंट करते करते खुद भी भूले और दूजे को भी नहीं मिला ज्ञान
गांधीजी को याद कर अहिंसा की बातें कर ली नहीं बनी बात /
भगतसिंह-चंद्रशेखर आजाद तलक के बलिदान को भी लिया साथ फिर भी सामने वाले ने नहीं मानी बात /
दूजों के घोटाले उजागर करने के फेर में खुद का घर साफ़ करने तक की नोबत आ गई /
ईमानदारी की कसमें खाते खाते खुद पर बेईमानी का ठप्पा लगा बेठे /
झूठ से नफरत नफरत हे कह कह कर सबसे बड़े झूठे बन बैठे/
दूजों को नाकारा बताते बताते खुद ही नालायक बनने का रास्ता चुनने लगे /
दूजों के घरों में आग लगाने वाले आजकल खुद के घर को टूटने से बचाने में लगे हें /
मोह माया से दूर रहने की नसीहत देने वाले खुद की सत्ता बचाने में जुटे /
भ्रष्टाचार मिटाने का दावा करने वाले ही खुद पर गिरी चिंगारीयों से अब डरने लगे हें /
वर्तमान हालातों से बुरे हालात तो कभी नहीं रहे पर इन्हें लिखते लिखते अब तो मेरे हाथों की अंगुलियां भी थकने लगी हें फिर भी कहीं ना कहीं सारी समस्याओं के समाधान की उम्मीदें अभी भी जिन्दा हे
महाभारत करा दी
फिर भी नहीं निकला समाधान
गीता की पुस्तकें भेंट करते करते खुद भी भूले और दूजे को भी नहीं मिला ज्ञान
गांधीजी को याद कर अहिंसा की बातें कर ली नहीं बनी बात /
भगतसिंह-चंद्रशेखर आजाद तलक के बलिदान को भी लिया साथ फिर भी सामने वाले ने नहीं मानी बात /
दूजों के घोटाले उजागर करने के फेर में खुद का घर साफ़ करने तक की नोबत आ गई /
ईमानदारी की कसमें खाते खाते खुद पर बेईमानी का ठप्पा लगा बेठे /
झूठ से नफरत नफरत हे कह कह कर सबसे बड़े झूठे बन बैठे/
दूजों को नाकारा बताते बताते खुद ही नालायक बनने का रास्ता चुनने लगे /
दूजों के घरों में आग लगाने वाले आजकल खुद के घर को टूटने से बचाने में लगे हें /
मोह माया से दूर रहने की नसीहत देने वाले खुद की सत्ता बचाने में जुटे /
भ्रष्टाचार मिटाने का दावा करने वाले ही खुद पर गिरी चिंगारीयों से अब डरने लगे हें /
वर्तमान हालातों से बुरे हालात तो कभी नहीं रहे पर इन्हें लिखते लिखते अब तो मेरे हाथों की अंगुलियां भी थकने लगी हें फिर भी कहीं ना कहीं सारी समस्याओं के समाधान की उम्मीदें अभी भी जिन्दा हे
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