आनंदपाल मामले में राजस्थान का मीडिया गाय बना ?
आजाद देश में रट्टू तोते से भी बदतर गुलामी भरे विचारों की मानसिकता लिए मन में आये उसके गुणगाण-लानतें तत्काल देने से हम बाज नहीं आते ? कोई किस आधार पर क्यों कैसे किसलिए कहता है और कहने वाला कैसा है ये जाने बुझे बताये बिन उसे हीरो या जीरो बनाने की चर्चाओं का बेमतलब दौर भी हमारे यहां खूब चलता है ?
ऐसे दौर में मिडिया की हालत तो दुधारू गाय जैसी हो गई है की जब तलक उसका दूध मिलता रहे वो बड़ी अच्छी लगती है, नहीं दूध दे तो हर कोई थाप लगाता हुआ उसे दुत्कारता नजर आता है।
हाल ही में राजस्थान की सारी बड़ी बातों यादों पर भारी पड़ रहे आनंदसिंह एनकाउंटर मामले पर उठ रहे सवालों के बीच भी मिडिया की भूमिका पर सवाल उठने लगे ?
मिडिया की गलती इतनी सी रही की पुराने आंदोलनों में क्या क्या हुआ करने वाला कौन इसे इग्नोर अनदेखा करते हुए उक्त आंदोलनों में सर्वेसर्वा बने लोगों की हालिया आंदोलन के बारे में बातें उजागर कर दी। वीडियो बातें सार्वजनिक होते ही बेचारी मीडिया के पीछे लानतों की बौछारें लगा दी गई। माना की जख्म कईयों के तन मन को अशांत सा कर गया है, लेकिन कुछ तो सच होगा जो बार बार इन्हीं लोगों पर सवाल उठते रहते हैं ?
रही बात आंदोलन को फैल करने की तो राजस्थान का ये पहला आंदोलन रहा जो शुरूआती दौर से लेकर अभी तलक युवा नेतृत्व सुखदेवसिंह गोगामेड़ी के हाथों में रहने से अभी तलक निर्णायक दौर में पहुंच चुका।
बिन बड़े सामाजिक नेताओं के इतना बड़ा आंदोलन आज तलक नहीं हुआ, फिर आज जो मीडिया में बड़े नेताओं के लिए दिखाया सुनाया उसकी चर्चा करके युवाओं के हितों मेहनत पर कुल्हाड़ी चलाने में हमें कतई शर्म नहीं आती है?
आनंदपाल के परिवार के पास सुखदेवसिंह, राजेंद्र गुढ़ा आंदोलन के शुरुआत से लेकर हिम्मत बंधाते दिखे, फिर दुर्गसिंह का भी पूरा साथ मिला।इसके अलावा राज्य भर के युवाओं ने भी इस एनकाउंटर के बारे सवाल उठाये। ये सब होता देख बड़े नाम खुद को किसी कौने में चले ना जाएं के भय से आंदोलन में साथ देने को खड़े हुए ?
अच्छा भला आंदोलन मांगें मनवाने के लिए चल रहा, फिर बड़े नामों के तले युवाओं को किनारे लगा मीडिया के जरिये क्या होना चाहिए कैसे करना का संदेशा जग जाहिर होता है तो मीडिया को ही सारा दोषी ठहराने का लिखा पढ़ी का दौर शुरू होता है।
आनंदपालसिंह के एनकाउंटर मामले को भी सुर्खियां इसी मीडिया ने दी थी, किसी बड़े नेता आदमी की मौत पर भी सम्पूर्ण कवरेज नहीं दिया होगा,जितना आनंदपाल सिंह मामले के हर एंगल बात को मीडिया ने दिखाया और दिखा रहा है। मालासर से दिन रात का कवरेज मीडिया ने दिया और अब सांवराद तलक का दे रहा है, ऐसे में मीडिया की बातों पर दिल लगाने से अच्छा जो दिल में सुराख हुए हैं उनको कारण जानते हुए दुरुस्त किया जाए।
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