राम रूठा राज रूठा तो लोगों का दिल टूटा?
राम रूठा राज रूठा तो लोगों का दिल टूटा?
घायल अस्पताल से छुट्टी की बाट जोहे, मरने वाला अंतिम संस्कार को तरसे। इतना कुछ होने पर भी हर कोई अपनी अपनी रोटियां आजकल राजस्थान में सेंकने की जुगत में व्यस्त।
घर में शव रखा है, परिजनों समर्थकों का हाल बेहाल है एक तरफ तो दूजी तरफ घायल के स्वस्थ होने की प्राथनाएं जोरों पर।
न्याय-अन्याय के घालमेल के शब्द बाणों और मामला सुलटाकर नंबर बढ़ाने के कारनामों से मरने वाले और जिंदा दोनों को शर्मशार करने के काम करने से भी कुछ लोग बाज नहीं आ रहे ?
मृतक के लिए दिलों दिमाग से न्याय मांगने के लिए लोग स्वतः ही आगे बढ़ने लगे तो अब प्रायोजित कार्यक्रमों से कुछ लोग भीड़ आगामी दिनों में जुटाने के जुगाड़ में जुटे।
सामाजिक विवशता ऐसी है की सच्चे लोगों के एक तरफ खाई तो दूजी तरफ कुआं जैसी विकट संकट वाली परेशानी सामने आई।
हाल के घटनाक्रमों से हिंदुत्व का दावा फैलाने वालों की कार्यशैली पर कालिख सी पुती हुई है। अंतिम संस्कार को तरसती लाश और फिर राजनैतिक कलाबाजियां धर्म संस्कार संस्कृति का काल बनती नजर इन दिनों राजस्थान में नजर आती है।
घायल अस्पताल से छुट्टी की बाट जोहे, मरने वाला अंतिम संस्कार को तरसे। इतना कुछ होने पर भी हर कोई अपनी अपनी रोटियां आजकल राजस्थान में सेंकने की जुगत में व्यस्त।
घर में शव रखा है, परिजनों समर्थकों का हाल बेहाल है एक तरफ तो दूजी तरफ घायल के स्वस्थ होने की प्राथनाएं जोरों पर।
न्याय-अन्याय के घालमेल के शब्द बाणों और मामला सुलटाकर नंबर बढ़ाने के कारनामों से मरने वाले और जिंदा दोनों को शर्मशार करने के काम करने से भी कुछ लोग बाज नहीं आ रहे ?
मृतक के लिए दिलों दिमाग से न्याय मांगने के लिए लोग स्वतः ही आगे बढ़ने लगे तो अब प्रायोजित कार्यक्रमों से कुछ लोग भीड़ आगामी दिनों में जुटाने के जुगाड़ में जुटे।
सामाजिक विवशता ऐसी है की सच्चे लोगों के एक तरफ खाई तो दूजी तरफ कुआं जैसी विकट संकट वाली परेशानी सामने आई।
हाल के घटनाक्रमों से हिंदुत्व का दावा फैलाने वालों की कार्यशैली पर कालिख सी पुती हुई है। अंतिम संस्कार को तरसती लाश और फिर राजनैतिक कलाबाजियां धर्म संस्कार संस्कृति का काल बनती नजर इन दिनों राजस्थान में नजर आती है।
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