शाह श्री के दौरे का सार, बरसात का भरा पानी और रोज की लूट पर नहीं कोई अंकुश ?
शाह श्री के दौरे का सार, बरसात का भरा पानी और रोज की लूट पर नहीं कोई अंकुश ?
कार्यकर्ता ना होना निराश। जनता कार्यकर्ताओं को ना कहे क्योंकि संगठन अभी मजबूत करना है। चाहे अगले चुनाव में सत्ता से ही बाहर पटक देना ?
संगठन मजबूत करके सत्ता फिर से पाने का पावर गेम चल रहा है, ऐसे में सरकार को कुछ कह नहीं सकते।
धर्म-जात-अगड़ा पिछड़ा बाबाओं संग बंद कमरों में वार्तालाप, खाना पीना के शोर भले ही खबरचियों ने चीख चीखकर नॉनस्टॉप दिखाए होंगे, लेकिन बरसात के पानी में तैर रही जनता की पीड़ाएं-समस्याएं दब भी नहीं पाई।
माननीय नेताजी ने संगठन को ऐसा मजबूत करने का मंत्र दिया की बैठक में आये एक जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंच गए ?
माननीय शाह श्री किसी गरीब के घर खाने पर तो पहुंच गए पर सत्ता तलक पहुंचाने वाली माई बाप जनता के घरों में आसपास भरे पानी को देख पाने की फुरसत नहीं निकाल पाए।
माननीय के दौरे के साथ शुरू हुआ बरसात आने का क्रम भी नहीं टूटा और ना ही सड़कों गली मोहल्लों में पानी भरने का चलन रुका। अपराधी भी ठेंगा जैसे निकाले ही घूम रहें हैं,जो साहेब के दौरे में व्यस्त प्रशासन को आज भी चुनौती दे गए।
अब राम का वनवास या तो खत्म कर या ये दौरे ,क्योंकि कोई फर्क पड़ा नहीं और उलटे आगमन के साथ बिगाड़ ज्यादा होने के हालत हो गए ?
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