#सवाईसिंहधमोरा , समाज हित के अलावा खुद का निज हित नही देखा
#सवाईसिंहधमोरा
चकाचोंध भरे रास्तों पर #सादगी सम्पूर्ण जीवन में रही। #स्वच्छ्ता विचारों की कूट कूट के भरी। ज्ञान का भंडार फिर भी कोई गुमान नहीं।
छोटे बड़े में कोई भेद ना करते हुए मार्गदर्शन करते रहना बड़प्पन रहा।
अकेले दिखते तो भी विशाल दिखते और भीड़ में भी विशाल ही दिखते।
साथ आया उसे आगे बढ़ाने के रास्ते ही तैयार किये चाहे खुद जहां थे वहीं खड़े रहे।
खुद #सवाईसिंहधमोरा साहेब ने कभी जो किया उसका जिक्र ना किया पर यदा कदा उनके साथी रहे आदरणीयों के थोड़े बहुत लिखे से उनका कद विशालकाय ही उभर कर सामने आया।
भारत सरकार के प्रसार मंत्रालय का आकाशवाणी हो या सामाजिक क्षेत्र धमोरा साहेब हर जगह सर्वश्रेष्ठ नजर आये। आजाद राजस्थान का कोई सा भी आंदोलन रहा उसमें भागीदारी रही। सर्वाधिक लोगों को स्नेह देने और सम्पर्क सूत्र बाँधने में भी आगे रहे।
पद कद की लालसा लिए जमाने में किसी संत की भांति जीवन यापन करने वाला कोई धमोरा साहेब की तरह नजर भी नहीं आता लगता है अब।
#श्रीपालजीशक्तावत के कहे गए शब्द और पीड़ा अब ह्रद्य को कटोच रही है। धमोरा साहेब को याद करते हुए श्रीपालजी ने चिंता जताई थी की जब तलक हो आप तब तक तो ये ज्ञान लोगों को मिलता रहेगा पर आपके जाने के बाद जो शून्य बनेगा उसका समाधान कैसे होगा ?
बेरोकटोक,इन्तजार कराये बिना सरल सुलभ स्वभाव से छोटे बड़ों की जिज्ञासाएं शांत करते हुए मार्गदर्शन करने वाले धमोरा साहेब के जाने से रिक्तता पसरी है।
सिर पर पगड़ी,कुर्ता-धोती,एक थैला पेन डायरी सहित आम यात्री की तरह ताउम्र त्याग-तपस्या के बल पर आगे बढ़ते रहे और संघर्ष दर संघर्ष से भी ना डिगने वाले #धमोरा साहेब इतनी यादें छोड़ गए हैं,जिन्हे याद करते करते ही ये जीवन मुक़्क़मल हो जाए।
साधारण सा जीवन जीते हुए भी जहां जहां उठे बैठे वहां वहां नायक बनकर ही उभरे धमोरा साहेब।
लेखक ,चिंतक,इतिहासकार और सामाजिक कार्यकर्ता सवाई सिंह धमोरा का 12 सितंबर को झूंझुनू जिले के धमोरा गांव में धमोरा का निधन हो गया था। अंतिम इच्छा के अनुरूप पैतृक गांव धमोरा में शेखावाटी के गौरव कहे जाने वाले सवाई सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। .आकाशवाणी के प्रसिद्द राजस्थानी वाचक धमोरा का 91 वर्ष के थे।
संघ शक्ति के पूर्व संपादक और राष्ट्रदूत के नियमित लेखक धमोरा बीते कुछ दिनों से थे बीमार।अंतिम क्षणों में अपनी माटी की गोद में गुजारने की इच्छा के साथ चार दिन पहले गए पैतृक गांव गए थे. सवाई सिंह धमोरा .पेरू प्रकाश ,चित्तौड़ के जौहर और गाँधी गाथा समेत कई पुस्तकों का धमोरा ने लेखन किया था। राजस्थानी भाषा और ज्ञान की डिक्शनरी के नाम से मशहूर धमोरा चर्चित भू स्वामी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। धमोरा .बेलाग टिप्पणियों और बेबाक लेखन के लिए मशहूर थे। धमोरा जीवन पर्यन्त साहित्य सृजन में जुटे रहे। उन्होने 1957 में गुढ़ा विधानसभा क्षेत्र से राम राजय पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव भी लड़ा था लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी शिवनाथ सिंह गिल से हार गये थे।
1949 में हुए चौपासनी आंदोलन में सवाई सिंह जी धमोरा के नेतृत्व में 109 लोगो के जत्थे ने गिरफ्तारियां दी।
वही भू स्वामी आंदोलन के लिए दो दल बनाये गए थे जिनमें एक भू स्वामी संघटन और दूसरे में क्षत्रिय युवक संघ के चुने हुए स्वयं सेवकों का क्षत्रिय युवक संघ से सिर्फ सवाई सिंह जी धमोरा ही थे जिन्हें सिर्फ गिरफ्तार होने के निर्देश दिए गए थे ।
भू स्वामी आंदोलन में सबसे ज्यादा जेल में धमोरा साहब रहे और प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से सभी मांगे मान कर आंदोलन समाप्त हुआ लेकिन सवाई सिंह जी, तन सिंह जी और आयुवान सिंह जी को जेल से रिहा नही किया गया था। हाई कोर्ट से तन सिंह जी के रिहाई के आदेश हो गए। जेल में सवाई सिंह जी और आयुवान सिंह जी रहा गए। जब मोहर सिंह जी लाखाउ ने देखा कि सरकार की मंशा इनको छोड़ने की नहीं है, तो उन्होंने कार्रवाई की और अंत में ये दोनों 13 अगस्त 1956 को जेल से रिहा कर दिए गए। इस प्रकार ये आंदोलन समाप्त हुआ था । धमोरा साहेब ने क्षत्रिय युवक संघ के हर एक निर्देश को हमेशा सर्वोपरि माना, हमेशा समाज हित के अलावा खुद का निज हित नही देखा।
Comments
Post a Comment