आस्था बड़ी है पर हमारी जिम्मेदारी भी कम नहीं

लखदातार का कलयुग में चमत्कार, हर कोई कोई दर्शन करने को आतुरता लिए पहुंचता है उनके दर पर।
रास्तों में श्याम बाबा के जयकारे और भंडारे खूब।
खाटू नगरी जाने वाले रास्तों पर जिधर देखो उधर ही भक्तों का अलबेला रैला जयकारे लगाते हुए मस्ती से चलने में मग्न।
हर साल का ये फागुन माह भक्तों में अपार ऊर्जा का समावेश करता ,लेकिन इन भक्तों की यात्रा में व्याप्त बाधाओं को दूर करने में शायद प्रशासन इच्छुक नहीं लगता ?
देश में ना जाने कितने देव-धाम होंगे जिनके दर्शनों के लिए समय समय पर पैदल जातरूओं के जत्थे कोसों दूर तलक चलकर पहुंचते होंगे।
देव धामों के कायाकल्प के तो बजट खूब सरकारें गिनाती हैं, लेकिन पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं के लिए कोई लम्बा सा पदमार्ग बनाने में शायद किसी की रूचि नहीं लगती ?
हाल ही में राजस्थान के खाटू श्याम का मेला सम्पन्न होने को है और दूरदराज से आने वाले पैदल यात्रियों की सड़क सुरक्षा में व्याप्त खामियों को वहीं का वहीं छोड़े जाएगा।
राजस्थान, हरियाणा सहित देश के कई जगहों से लोग कई दिनों की पैदल यात्रा पूरी करते हैं और उनको पदयात्रियों के लिए अलग से बने पदमार्ग की कमी भी खलती है। कभी कच्ची तो कभी पक्की सड़क पर वाहनों की भागमभाग से बचते बचते चलना पड़ता है। तपती जमीन पर कई किलोमीटर की यात्रा बाबा के जयकारे लगाते भक्त पूरी करते रहते हैं।
माना की भक्ति में बड़ी शक्ति है पर उनकी सेवा करना भी सबसे बड़ा धर्म होता होगा ? जब भक्तों की सेवा को सर्वोपरि माना जाता है तो उनकी राहों में आने वाले वाहन, कंकर मिटटी इत्यादि को हटाने का काम भी पावन होगा।
धन्य और साधुवाद के पात्र हैं जगह जगह भंडारे लगाकर जातरुओं की सेवा करने वाले ,लेकिन इन्ही दानदाताओं और सामाजिक सरोकार करने वालों की तरह सरकारी मशीनरी भी कोई ऐसा रास्ता बनाये जिससे पैदल चलने वाले भक्त बिना रुकावट के अपनी मंजिल तलक पहुँचते जाएं।

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