दीपावली का खुमार उतरा ही नहीं की नवम्बर के प्रथम सप्ताह में होली के हुड़दंग सहित तमाम तरह के नजारे देश में दिखने लगे हैं। 
वर्तमान दौर नित रोज नए विवाद-बातें लाता है और राजनीती के गलियारों से उछलते उछलते वो आमजन की चौखट पर धड़ाम सा गिरता है। 
आजादी के बाद से जो नहीं हो पाया वो सब नरेंद्र मोदी के राज में होने का आतुर लगता है। 
देश की राजनीती की हालत उस बकरे समान लगती है जिसे काटने से पहले खूब खिलाया पिलाया जाता है और बाद में कई जनों में वितरित। देश में नामुमकिन को मुमकिन करते हुए मोदी पूर्ण बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बने पर पहले ही दिन इनको विरोध करने और कई समर्थन में रहने वाले भी अभी तलक स्वीकार नहीं पा रहे।
हर सरकार के मुखिया की एक कार्य शैली होती है और हिंदुस्तान में पीवी नरसिम्हा राव के बाद नरेंद्र मोदी की कार्य शैली अभी तलक लोगों की समझ से परे लगती है,शायद इनके विरोध की असल वजह भी ये हो।
भाजपा के विपक्षी दलों का विरोध करना तो समझ में आता है की लगातार चिख चिल्लाहट से ही वो जनता को खुद के भी होने का अहसास कराते हैं पर घुटन भाजपा कार्यकर्ताओं की भी कम नहीं,जिसे सामने लाते भी वो डरते हैं।
विपक्ष तो विगत दिनों हुए घटनाक्रमों से ऐसा लगने लगा है की वो केवल मात्र केंद्र सरकार जैसे चलाना चाहती है वैसा ही चलता है।
अनगिनत समस्याओं के होने के बावजूद पक्ष-विपक्ष रोजाना कोई ना कोई नए मामले को लेकर अड़ाअड़ी पर रहता है और जनता को कौन जीता कौन हारा का पता तलक नहीं चलता ?
भोपाल जेल से भागे कैदी एनकाउंटर मामले का जोरदार विवाद होने लगा और इस बीच ना जाने कैसे पूर्व फौजी ने आत्महत्या कर ली। आत्महत्या मामले में विरोधी आगे बढ़ने लगे, नेताओं की गिरफ्तारियां होने लगी और ये बातें क्या सही क्या गलत तलक पहुंचती की उससे पहले ही एनडीटीवी पर बैन की चर्चाएं सारे मसलों पर भारी पड़ने लगी ?
बैन कोई सही ठहराने में लगा तो कोई गलत ,कुल मिलाकर मेरा झंडा रहे सबसे ऊपर की जोर आजमाईश सी लगी है। अब मिडिया संस्थानों की बात है तो उसके हक अधिकार को लेकर सब एकजुटता का राग बनाने में लगे हैं.लेकिन मिडिया संस्थानों में काम करने वाले किस वेतन कैसे कैसे शोषण में काम करते होंगे ये दिखाने-छापने से डरते हैं ?
देश में बातूनियों-हल्लाबाजों के तमाम प्रयास स्वार्थपूर्ति के चलते दम तोड़ते से लगते हैं। मरने को तो कई लोग रोजाना मरते हैं और बिन शिनाख्त के ही अंतिम संस्कार होता है पर ज्यादातर नेता कभी उनको रोने गए ये दिखता नहीं।

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