देश के प्रधानमंत्री ने 500-1000 के मामले में मन की बात जाहिर कर सम्पूर्ण जनजीवन में हलचल एकाएक मचा दी। सेना के अध्यक्षों की गुफ्तगूं और भारतीय मुद्रा के सर्वाधिक चलन वाले नोटों का इंतकाल की खबर देश-विदेश में पड़ने वाले असर की जोरों से चर्चाएं शुरू करवा चुकी हैं।
हालात आधी रात तलक ऐसे दिखने लगे की आमतौर पर बत्ती गुल रखने वाले पेट्रोल पंपों पर भी पूरी रोशनी और लग्जरी वाहनों की कतार जुटी है। एटीएम भी लोगों की भीड़ से आबाद हैं तो जिसको भी नोटों के चलन पर आने वाले दिनों के कार्यक्रम की जैसी तैसी जानकारी है बस चर्चा करने की पड़ी है।
सरकारी आदेशों जैसा हश्र ना हुआ तो पीएम का ये काम भारतीय अर्थ,राजनीती,विदेश सहित आमजन की नीतियों के लिए मील का पत्थर साबित होते देर ना लगेगी। द्र्ढ इच्छा शक्ति रखते हुए मन की बात लागू करवा दिया तो देश की कई समस्याओं का आने वाले साल में नामों निशान ही ना रहेगा और एक बारगी फिर से नमो नमो की गूंज सुनाई देते देर भी ना लगेगी।
शुरआती लम्हों में तो मेहनतकश पेशोपेश में पड़े हैं और इधर-उधर से लक्ष्मी जमा करने वाले सुन्न। तत्काल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा,वैसे भी सबसे पहले खुलासा हमने किया,एक्सक्लूजिव रिपोर्टें जनता को परोसने वाले भी इस फैसले की जानकारी ना जुटा पाने से चारों खाने चित हैं। मैदान प्रदर्शन करने वालों,हल्लाबाजों के लिए पीएम मोदी ने फिर से सजवा दिया है। अब पहले अपने पास जमा नोट बदलवाएं या भीड़ जमा करके उनको रद्दी करें ये समस्या भी घर घाल रही लगती है।
मोटा मोटा तो इस फैसले को लागू करने का उचित समय लगता है,क्योंकि वैसे भी हर क्षेत्र चाहे वो प्रापर्टी का हो या वायदा बाजार सुस्ती की मार से लिपटा है।
लोग कहते हैं की छोटे मारे जाएंगे पर छोटों के बचाने को बचा ही क्या जो ये फैसला असर उन पर कुछ करेगा। मारे तो बड़े जाएंगे जब वो नोट बदलवाने की खातिर इधर उधर फिरते नजर आएंगे। मेहनत का पैसा बदलवाने की खातिर तो तमाम तरह के हलफनामे मेहनतकश जमा करवा देगा पर हराम,बेईमानी की कमाई कोई कैसे एडजस्ट करेगा ये देखने वाली बात होगी।
देश के अंदर तो तत्काल हल्ला मचाने का लाइलाज रोग लगा है पर इस फैसले का असर लूटे पिटे हमारे पडौसी देशों को अभी से खाने लगा होगा। सीमापार से अवैध नोटों की आवक की मार तो रुकेगी ही साथ ही उनकी नीति रीती भी डूब की कगार पर होगी।
ऑन रिकार्ड नोटों की अदला बदली कई काले चेहरों को सरेआम सफेद करेगी इसका भी रहेगा इन्तजार।
एक आध महीने की परेशानी झेल गए आम लोग तो भविष्य में ख़ास वर्ग के दुर्दिन आ जाने हैं।
सीधा सा गुना भाग है ,जिसके पास लिखा पढ़ी की पूंजी हे उनके लिए नहीं कोई चिंता की बात और उचंती जमा पूंजी वाले देखो बर्बादी का कैसे मिलता है साथ।
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