प्रकृति को मारते मारते थके नहीं तो प्रकृति ने खुद दिल्ली का हाल बुरा कर गम्भीर चेतावनी दी है ?
बातों का हल्ला, कागजी हेराफेरी,फोटो खिंचवा के नम्बर बढ़ाने, बार बार बजट हड़पने से त्रस्त प्रकृति घोर नाराजगी प्रकट करने लगी ?
पर्यावरण दूषित करने में सामूहिक योगदान और दोष किसी एक को थोप खुद करें आराम जैसे हथकण्डों से परेशान पर्यावरण भी इंसान को तंग करने का फार्मूला अख्तियार करने से चूकता नहीं लग रहा है।
स्वार्थपूर्ति की खातिर दूजों को खराब-कबाड़ करने की बढ़ती लालसा का ही असर है की समस्याओं में इजाफा होते रहने के बाद भी समाधान की तरफ बढ़ते नहीं कदम हमारे।
दिल्ली में सर्दी के शुरुआत में ही सूर्यदेव के दर्शनों को तरसते रहना तो अग्रिम चेतावनी जैसा है,बाकी तो आदतों में नहीं किया हमने सुधार तो अंजाम के बारे में कोई नहीं जानता होगा।
पर्यावरण प्रदूषण को संतुलित करने में माना की काफी समय लगेगा,परंतु ध्वनि,जल सहित कई अन्य प्रदूषणों का हुक्मरान चाहे तो फटाफट निकाल सकते हैं समाधान। इच्छा शक्ति को मजबूत रखते हुए अपने पराये समान कर ठोस कार्रवाइयां किये बिन कुछ अच्छा हो नहीं पायेगा।
पेड़ पौधे बड़े बड़े लगाते हुए प्लास्टिक पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाने से ही लोगों को कुछ अहसास होगा और वो भी कोई नया-पुराना रास्ता तलाशेंगे। शीर्ष स्तर से निकला आदेश कठोरता से अमल में लाने के लिए प्रदूषण फैला रहे उधोगों को किसी भी सूरत में बंद करवाकर ये सोच विकसित करनी होगी की कितना ही नफा हो या नुकसान पर जनजीवन सहित प्रकृति से किसी को भी नहीं करने देंगे खिलवाड़। सुविधाएं बढाने की दौड़ में प्रकृति प्रदत आशीर्वाद को नकारने के चलन को बंद करने के कार्यक्रमों पर भी अंकुश लगाना होगा।
देर रात्रि तलक बिन काम के निशाचर बनकर घूम रहे लोगों को दंड विधान के सहारे काबू में करना कोई मुश्किल काम नहीं।
बेमतलब में इधर उधर घूम कर ध्वनि-धुआं प्रदूषण को बढावा देने वालों को एक स्थान पर टिका देने की नसीहत भारी से देने से सड़कों-बाजारों पर भी दवाब कम होगा। आधे से ज्यादा लोग तो बेमतलब में ताका झांकी,पान बीड़ी मसाले की खातिर दूर दराज तलक घूम आते हैं और लोगों को परेशानियों की सौगातें देते जाते हैं, ऐसे जमावड़ा वाले स्थानों पर कानून भी अमर बेल बनकर दिखाए ताकि घुमक्कड़ प्रजातियां कोई नुकसान ना कर पाए।
मानसिक प्रदूषण भी आजकल बहुत फैल रहा जिससे बड़े बड़े मॉल,चौराहों,सार्वजनिक स्थानों,पार्कों पर लोगों की मुफ्त में इन्टरनेट,वाईफाई का लाभ उठाने की भेड चाल भीड़ उमड़ती है।
सवालों के घेरे में हम स्वयं खड़े हों तो समाधान निकालने तलक दूजा सवाल करने की किसी को इजाजत ना हो, ऐसा ही कुछ भारतीय दंड विधान हो तो आमजन के सपने भी हो साकार।
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