मोह माया का लोभ छोड़ पाते नहीं और नित रोज ठगे जाने से पहले होश में आते नहीं

सांसारिक जीवन में मोह माया का लोभ छोड़ पाते नहीं और नित रोज ठगे जाने से पहले होश में आते नहीं
जिधर जाओ उधर परेशानी पाओ, समाधान होते हैं पास में पर धन लगाए बिन समाधान करने का नहीं करता मन। कहने को तो सब सब कुछ जानते हैं,वेद पुराण सहित गूगल बाबा पर किसी बात का हल झट से तलाशते हैं। इतना स्वयं में ज्ञान होने के बावजूद खुद की समस्या का दूजों को परेशान किये बिन समाधान हम निकाल नहीं पाते।
शुरुआती दौर में तो कोई बीमारी होते ही नजदीकी सरकारी-निजी अस्पताल की तरफ भागते हैं। समय रहते समस्या ना मिटते देख दूर दराज तलक के नीम-हकीमों का दर भी टटोल आते हैं।
बीमारी का अंत भले ही ना होता होगा,उससे पहले ही यूनानी,अंग्रेजी,आयुर्वेद चिकित्सा की शरण में हम शरणागत मन मारकर हो जाते हैं। सरकारी प्रमाणपत्र धारी बीमारी दूर ना कर पाए तो देव-देवरों सहित बाबाओं को प्रसादी चढाते हुए मंगलकामना की ज्योतें भी जलाकर स्वास्थ्य सहित सुख शांति जैसे तैसे बनाने का काम करते जाते हैं।
मानसिक रूप से बीमार ऐसे हो चले हैं की घर से लेकर जहां तलक पड़ते हैं हमारे कदम,वहां के ज्ञानी जनों, बड़े बुजुर्गों की बातों को अनसुनी-बकवास मानते हुए कुछ पैसे देकर इलाज करवाने से ही राहत पाना उचित समझते हैं।
घरेलू नुस्खों को अपनाना भी हमें कोई भीषण परेशानी लगता है,लेकिन जब कोई इलाजकर्ता उन्हें अपनाने की सलाह देता है तो हम फटाफट कुछ भी सोचे बिन उन घरेलू नुस्खों को आत्मसात ना जाने कैसे करते रहते हैं।
बड़े बुजुर्गों की बातों की अनदेखी का ही असर ऐसा हुआ की दाम दिए बिन समाधान हो जाए किसी समस्या का ,हमें भाता नहीं।
मशीन से भी बदतर होते जा रहे शरीर को कई रोगों से मुक्त करने में तो घर गृहस्थि के नुस्खे अचूक दवा का काम करते हैं, लेकिन हम दूजों को भले ही वो बताते होंगे पर खुद पर आजमाने में परेशानी का असहास करते हैं?
ज्यादा कुछ नहीं केवल मात्र सूर्योदय से कुछ पहले ही उठ जाएं तो दिन भर में मानसिक सन्तुलन ही बना रहे। जल्दी उठने वाला जल्दी ही सोयेगा। जो जल्दी उठता जल्दी सोता वो फ़ालतू के किर्याकर्मों की दिनचर्या से यकीनन बचता है।
कोई जानकार कहता है की सुबह जल्दी उठकर थोडासा घूम आया करो,कुछ व्यायाम इत्यादि किया करो तो बड़ा बुरा मान जाते हैं हम,वही बात बीमारी चिपक जाने पर डॉक्टर साहेब कहते हैं तो पूरा टाइमटेबल बनाकर बाकी के तामझाम तलक से दूरी बना लेते हैं।
बाकी बातें तो आजकल हर दिन किसी ना किसी के नाम से छपती चलती रही है,बस उनमें से जो भी अच्छी लगी उसे आत्मसात करने की हमें ही कुछ भक्ति करनी पड़ेगी।

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