चीन ने हमारी तरफ आने वाला पानी रोक लिया पर हमारी सरकार उस तरफ से आने वाला माल नहीं रुकवाती ?
सरकारी बंदोबस्त नाकाफी हो जाएं अवाम गुस्साते हुए चीन का सामान हाथ-काम में ना लेने की जगी अलख में तो साथ दे।
यकीन मानो इस तरफ चायना का माल नहीं बिकने के समाचार उड़ने लगे तो दूजी तरफ चीन ने हमारा रोका पानी फटाक से छोड़ा।
बड़े बुजुर्गों ने कहा भी है जब शान्ति-बातचीत से सुलह ना हो तो हुड़दंग सहित तमाम घरेलू नुस्खों को अपनाकर दुश्मन को तड़पाओ।
मानते हैं की चीन के माल का बहिष्कार का कहना बहुत आसान पर अमल में लाना कठिन लगता है। असल बात तो ये है की हमने कभी इस पर अमल करने के बारे में असल में जोर दिया नहीं बस रात गई बात गई जैसे ही स्वीकार किया।
ज्यादा कुछ नहीं कहना पर जो कहते हैं की चीन से सस्ता माल माल तो बाजार में लाओ,उनके लिए घरेलू नुस्खा है ,अगर वो अपनाते हैं तो सस्ता तो क्या पर्यावरण से लेकर सेहत के लिए भी बड़ा अच्छा रहेगा।
किसी भी काम के असल मजे आएं,उसके लिए शरीर को थोड़ा कष्ट शुरुआत में देना पड़ेगा पर उसके बाद के वक्त में बड़ा आराम भी मिलता है।
चीन के दिए-लाइट,रोशनी-पटाखे इत्यादि की तरफ अबकी देखो ही मत और स्वदेशी सूरत को उतारो मैदान में,फिर देखो दीपावली मजा ,यहां हम देश हित में खुशियां मना रहे होंगे और सीमा पार चीन जल भून रहा होगा।
दिया लेंगे मिट्टी का एक दफा महंगा जरूर लगेगा पर वो बारम्बार उपयोग करने लायक भी तो रहेगा। एक बार में खर्च हुआ पैसा बार बार में दिया काम आने से बचत ही बचत का तैयार करेगा रास्ता।
दिये में जलाने के लिए घरवालों मिलने वालों के साथ मिलकर बनाओगे बाती तो स्नेह अपनेपन के बढ़ने से चौड़ी हो जायेगी छाती।
दिये जलाने से बिजली की कितनी होगी बचत ये हमने सोचा नहीं और चीन से सस्ता माल का दे दिया ओलमा ?
कभी बनाना घर पर बनने वाला माल और काम में लेना जरूर एक बार ,यकीनन उसके बाद जो आंनद आयेगा उसके बाद नहीं जमेगा खुद को ही चीन का सामान।
सरकारी बंदोबस्त नाकाफी हो जाएं अवाम गुस्साते हुए चीन का सामान हाथ-काम में ना लेने की जगी अलख में तो साथ दे।
यकीन मानो इस तरफ चायना का माल नहीं बिकने के समाचार उड़ने लगे तो दूजी तरफ चीन ने हमारा रोका पानी फटाक से छोड़ा।
बड़े बुजुर्गों ने कहा भी है जब शान्ति-बातचीत से सुलह ना हो तो हुड़दंग सहित तमाम घरेलू नुस्खों को अपनाकर दुश्मन को तड़पाओ।
मानते हैं की चीन के माल का बहिष्कार का कहना बहुत आसान पर अमल में लाना कठिन लगता है। असल बात तो ये है की हमने कभी इस पर अमल करने के बारे में असल में जोर दिया नहीं बस रात गई बात गई जैसे ही स्वीकार किया।
ज्यादा कुछ नहीं कहना पर जो कहते हैं की चीन से सस्ता माल माल तो बाजार में लाओ,उनके लिए घरेलू नुस्खा है ,अगर वो अपनाते हैं तो सस्ता तो क्या पर्यावरण से लेकर सेहत के लिए भी बड़ा अच्छा रहेगा।
किसी भी काम के असल मजे आएं,उसके लिए शरीर को थोड़ा कष्ट शुरुआत में देना पड़ेगा पर उसके बाद के वक्त में बड़ा आराम भी मिलता है।
चीन के दिए-लाइट,रोशनी-पटाखे इत्यादि की तरफ अबकी देखो ही मत और स्वदेशी सूरत को उतारो मैदान में,फिर देखो दीपावली मजा ,यहां हम देश हित में खुशियां मना रहे होंगे और सीमा पार चीन जल भून रहा होगा।
दिया लेंगे मिट्टी का एक दफा महंगा जरूर लगेगा पर वो बारम्बार उपयोग करने लायक भी तो रहेगा। एक बार में खर्च हुआ पैसा बार बार में दिया काम आने से बचत ही बचत का तैयार करेगा रास्ता।
दिये में जलाने के लिए घरवालों मिलने वालों के साथ मिलकर बनाओगे बाती तो स्नेह अपनेपन के बढ़ने से चौड़ी हो जायेगी छाती।
दिये जलाने से बिजली की कितनी होगी बचत ये हमने सोचा नहीं और चीन से सस्ता माल का दे दिया ओलमा ?
कभी बनाना घर पर बनने वाला माल और काम में लेना जरूर एक बार ,यकीनन उसके बाद जो आंनद आयेगा उसके बाद नहीं जमेगा खुद को ही चीन का सामान।
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