रामजी भला मानो रामलीला वालों का जो अभी तलक भी तुमको गृह प्रवेश करवा रहे हैं। 
वैसे हम भी प्रायोजित कार्यक्रमों में तुम्हारे जयकारे लगाने में पीछे नहीं रहते हैं। 
तुम इंसानी फितरत बस्तियों को गौर से देख लो तो माथा दुखने लग जाएगा।
दीपावली-दशहरा तुम्हारे कारण मनाते हैं, फिर भी दूसरों का गुणगान कर जाते हैं। तुम को तो नींव के अंदर छुपा कर मतलबपरस्ती की इमारतें बड़े ही शातिराना अंदाज में खड़ी करते जाते हैं। 
दशहरा पर राम नाम जपकर अगले दिन ही तुम्हे भूल अपना घर चमकाने में लग जाते हैं।
तुम किस रस्ते से आ रहे हो कब तक आओगे उसकी चिंता छोड़कर बाजारों में घूमने पहुंच जाते हैं। व्यापारी भी तुम्हारी घर वापसी के मौके को भुनाने के लिए नई नई स्कीमें बाजारों में सजावट करके लाते हैं।
तुम को भूल हम तो धन धन पाने की खातिर लक्ष्मी मैया की शरण में पहुंच जाते हैं। तुम आओगे तो रहोगे कहां इसका इंतजाम किये बिना अपना पेट भरने का खूब जुगाड़ जोरों से चलाते जाते हैं।
अभी तक तो कहीं तुम्हारे रहने का आजीवन पट्टा जारी होता नजर आता नहीं है और तुम्हारी मर्यादा के कारण किरायानामा बनता भी नहीं लगता है।
झूठ का सहारा तुम लोगे नहीं तो अगले साल तलक का पग फेरा फिर से होता लगता है।

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