रामराज की आस अर्थयुग में तुम्हारे अघोषित वनवास से अधूरी ?
रामचन्द्रजी जय हो, कथाओं-इतिहास के अनुसार तुमने राक्षस राज का अंत कर ही दिया।
अब वनवास के बाद घर वापसी की तैयारी भी जोरों से बाजारों में हो रही है, फिर भी प्रभु तुम रहोगे कहां ये समस्या पहले जितनी आज भी भारी है।
रामजी तुम्हें ही जब इतनी परेशानी है तो तुम्हारी प्रजा की कैसे-कहां सुनवाई होनी है।
तुम जंगल-जंगल राक्षसों का अंत करने में बिजी रहे तो राक्षस ने इंसानी बस्ती में ठिये बना लिए।
अब लौटोगे तो फिर से राक्षस राज का अंत करने का अनलिमिटेड युद्ध लड़ना पड़ेगा ?
युद्ध लड़ने के लिए कोई ठौर-ठिकाना भी चाहिए पर तुम तो खुद घर-बदर हो तो कैसे क्या होगा ये चिंता अच्छाई की चिता सजाये जा रही है।
प्रभु तुम हर साल सत्य की जीत का जश्न मनवाकर किधर अंतर्ध्यान हो जाते हो, असल समस्या क्यों नहीं बतलाते हो।
तुम्हारे जाने के बाद से तो देश की कानून व्यवस्था बदल गई है ,अब लौटोगे तो तुम कहीं कानूनी दांवपेंचों में ही कहीं उलझ ना जाओ ये डर भी सताए है।
वीजा,मूलनिवास, नागरिकता, आधार , वोटिंग कार्ड जैसी फॉर्मल्टीजीज (औपचारिकताओं) में तुम उलझकर रह जाओगे ?
तुम्हारे जाने के बाद तो घर भी विवादित हो चला है।
अदालत में प्रभु के घर का मामला पेंडिंग पड़ा है तो फिर तुम रैन बेसरों में रहकर कैसे धरती पर व्याप्त पाप का अंत कर पाओगे ?
सोचो प्रभु कुछ ना कुछ अपने ठिकाने के बारे में , अदालतों की तारीखों का फेर कैसे मिटे इसका भी अबकी बार आते ही फुल एंड फाइनल निर्णय करा लो तो घर का जीर्णोद्धार रंग रोगन की प्लानिंग फलीभूत होगी या नहीं क्लियर तो हो।
रामचन्द्रजी जय हो, कथाओं-इतिहास के अनुसार तुमने राक्षस राज का अंत कर ही दिया।
अब वनवास के बाद घर वापसी की तैयारी भी जोरों से बाजारों में हो रही है, फिर भी प्रभु तुम रहोगे कहां ये समस्या पहले जितनी आज भी भारी है।
रामजी तुम्हें ही जब इतनी परेशानी है तो तुम्हारी प्रजा की कैसे-कहां सुनवाई होनी है।
तुम जंगल-जंगल राक्षसों का अंत करने में बिजी रहे तो राक्षस ने इंसानी बस्ती में ठिये बना लिए।
अब लौटोगे तो फिर से राक्षस राज का अंत करने का अनलिमिटेड युद्ध लड़ना पड़ेगा ?
युद्ध लड़ने के लिए कोई ठौर-ठिकाना भी चाहिए पर तुम तो खुद घर-बदर हो तो कैसे क्या होगा ये चिंता अच्छाई की चिता सजाये जा रही है।
प्रभु तुम हर साल सत्य की जीत का जश्न मनवाकर किधर अंतर्ध्यान हो जाते हो, असल समस्या क्यों नहीं बतलाते हो।
तुम्हारे जाने के बाद से तो देश की कानून व्यवस्था बदल गई है ,अब लौटोगे तो तुम कहीं कानूनी दांवपेंचों में ही कहीं उलझ ना जाओ ये डर भी सताए है।
वीजा,मूलनिवास, नागरिकता, आधार , वोटिंग कार्ड जैसी फॉर्मल्टीजीज (औपचारिकताओं) में तुम उलझकर रह जाओगे ?
तुम्हारे जाने के बाद तो घर भी विवादित हो चला है।
अदालत में प्रभु के घर का मामला पेंडिंग पड़ा है तो फिर तुम रैन बेसरों में रहकर कैसे धरती पर व्याप्त पाप का अंत कर पाओगे ?
सोचो प्रभु कुछ ना कुछ अपने ठिकाने के बारे में , अदालतों की तारीखों का फेर कैसे मिटे इसका भी अबकी बार आते ही फुल एंड फाइनल निर्णय करा लो तो घर का जीर्णोद्धार रंग रोगन की प्लानिंग फलीभूत होगी या नहीं क्लियर तो हो।
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