भाजपा के धुरंधर मंथन कर रहे हैं ,आयाराम के सहारे जीत के धागे बन रहे हैं ?रीता को शामिल कर लेंगे फिर भी वरुण गांधी गले की फांस बने हैं ?
लेकिन वरुण गांधी की मौन महत्वाकांक्षा यूपी चुनाव तलक उनको अनचाहे नफा-नुकसान के चिंतन में डुबोये रखने को आतुर लगती है। 
वरुण गांधी को आगे बढ़ाने से दिग्गज डरे डरे से लगते हैं , क्योंकि वो एक और मोदी जैसा नेता शायद अब नहीं चाहते हैं। 
अटल-आडवाणी के राज में भी मोदी का पदार्पण हुआ उसने जो गुल खिलाया उससे जमे जमाए नेता को हाशिये पर डाला ?
कुछ ऐसी ही आशंका भाजपा सहित अन्य दलों के नेताओं को वरुण गांधी के आगे बढ़ने से होती लगती ?
वैसे तो कई राज्यों में चुनाव होंगे,पर यूपी की सत्ता पाना भाजपा की प्राथमिकता में तो राजनाथ का हाथ किस तरफ बढ़ता है ये कोई ना जाने ?
योगी, साध्वी ,दलित, ब्राह्मण, राजपूत,पिछड़ा का वोट बैंक दिखाकर हर कोई खुद को सीएम दावेदार बनाने में जुटा तो दुःसाहस, तेजतर्रार दिमाग के खेल से वरुण गांधी ने सबको चिंता में डाल रखा।
भाजपाई कांग्रेस मुक्त वातावरण का सपना देख रहे और यूपी में ये केवल वरुण गांधी के सहयोग के बिन कहीं अधूरा ना रह जाए ,ये भी डर रहे।
युवा-बुजुर्ग सबका का घोल जैसे वरुण को जन्मजात मिला, शायद इसीलिए नेपथ्य में रहने के बावजूद सत्ता के सबसे बड़े केंद्र यूपी में इनके नाम से हल्ला मचा है।

Comments

Popular posts from this blog

आनंदपाल मामले में राजस्थान का मीडिया गाय बना ?

आयोजन के वक्त हल्ले बाकी वक्त सुन स्पाट