जानें जोखिम में डाल देने वाली करतूतों के हस्ताक्षर-उदघाटन कर्ताओं के खिलाफ कम से कम ३०७ और राजकोष को नुकसान, घोटाला हेराफेरी ठगी सहित तमाम अराजक अपराधों की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज क्यों नहीं होता और तत्काल गिरफ्तारियां क्यों नहीं होती ?
सड़कें-पुलिया टूटती-धंसती हैं,फिर ज्यादा हल्ला मच जाए तो कम्पनी को ब्लेक लिस्टेड कर देंगे। अगर पूर्ववर्ती सरकार का काम हुआ घटिया तो जांच आयोग बैठा देंगे। 
ऐसे मामलों में किसी दोषी की बर्बादी हुई हो ऐसा सुनने में आया नहीं, चाहे सरकारी खजाने की कितनी ही लूट कमीशनखोरों ने कर ली हो।
बरसात का दौर जारी है और देश के कई शहरों में कभी सड़क धँसी तो कभी पुलिया टूटने के घटनाक्रम हो रहे हैं। फिर भी सरकारी मुखियाओं की आंखें हकीकत नहीं देख पा रही ?
बार बार सरकारी पैसे की बर्बादी होने के कारण-कारकों से वसूली करने का विधान नहीं होने-बनाने की वजह से लोगों की जानें भी संकट में पड़ सकती है।
इन सड़ कों पुलियाओं को बनाने वालों की जगह अगर कोई वाहन या आम इंसान ऐसी गलतियां करता तो कब का उसके खिलाफ दण्ड विधान की तमाम धाराओं का इस्तेमाल हो चुका होता।
सड़कों-पुलियाओं से हर पल अनगिनत लोग गुजरते हैं और उनका धंस जाना मानव जीवन को संकट में डाल रहा है। अब ऐसे हालातों में घटिया निर्माण कराने वाले और किसी भी योजना के शुरुआत से लेकर अंतिम पृष्ट पर जिन जिन लोगों ने हस्ताक्षर किया उनके खिलाफ मामले दर्ज कर जेल की सलाखों के पीछे भेजने में देरी क्यों ? घटिया निर्माण हुआ तो उसे कराने वाला भी होगा ही, जब कररने वाला है तो उसे बढावा देने वाला भी होगा ,जब खेल पूरा खुला हुआ तो इन मक्कारों को एक साथ बिन सुनवाई का हक दिए डाल दो जेल में और रिकवरी जमा कराने पर ही किसी अदालत में पक्ष रखने का शर्तिया बन्दोबस्त कर दो। अगर इस हुआ तो आने वाले दिनों में तो कुछ भला होने की उम्मीद बंधेगी ?
या फिर छोटे चोरों को सजा देना और बड़ों लुटेरों को प्रोत्साहन देकर खुद का घर भरना ही नेताओं का पर्ण धर्म हो तो ये सब जंजाल रात गई बात गई की तरह भूलता रहेगा मेरे देश का इंसान। 

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