सफलता-असफलता के अर्थों में उलझे हम कूछ भी बुरा होने का दोष फटाफट दूसरे के माथे मंड देते हैं
सफलता-असफलता के अर्थों में उलझे हम कूछ भी बुरा होने का दोष फटाफट दूसरे के माथे मंड देते हे / कभी ये नही सोचते की इसमें कही न कही व्यक्तिगत दोष भी सबसे बड़ा गुनहगार हे ?
खुद के मरे ही स्वर्ग मिलता हे ये सुना हे पर रविन्द्र के सुनाये किस्से ने इसे पुख्ता किया?
अपनी बिगडती दशा से परेशान बाल कटिंग की दुकान चलाने वाला जब देखो भगवान को कोसता रहता की इतनी पूजा पाठ के बाद ये तूने केसा हाल किया /
रोज रोज के ओल्मे मिलने से भगवान भी दुखी रहने लगा / अब भगवान परेशान हो चला तो उसने बाल कटिंग की दुकान चलाने वाले की समस्या का निदान करने की सोची और रूप बदल कटिंग कराने पहुच गया/ भगवान बाल कटा रहे हे और काटने वाला भगवान को कोसे जा रहा हे / भगवान ने उससे पूछा की भाई तुम भगवान को इतना कोसते क्यों हो / दूकान वाला दुगने वेग से बोलने लगा की इतनी पूजा पाठ करता हु पर वो मेरी सुनता नही हे सुध नही लेता हे /
ये बात सुनकर भगवान ने उसे दुकान के बाहर बेठे एक फटेहाल भिखारी दिखाया और बोले इसके बाल देखे तुमने / दुकान वाला बोला बहुत बड़े हे / भगवान ने पूछा तुमने काटे क्यों नही तो दुकानवाला बोला ये मेरे पास आया नही इसलिए काटे नही /
फिर भगवान बोले जब ये आया नही तो तुम तो जा सकते थे इसके पास कम से कम ये भला तो होता उसका /
फिर भगवान बोले अब तुम्हारे पास भी भगवान आये नही हे तो तुम्हारा केसे भला होता /
खुद पर लेकर सोचो तुम की ये फटेहाल भिखारी तुम्हारे पास आने की हालत में नही तो तुम जा सकते थे /
भगवान फिर बोले जेसा करोगे वेसा ही मिलेगा / इतना कहकर भगवान ने अपनी राह पकड़ी और दुकान वाला कोसना भूल उस फटेहाल की सुध लेने कुछ सोचता सोचता चल पड़ा /
खुद के मरे ही स्वर्ग मिलता हे ये सुना हे पर रविन्द्र के सुनाये किस्से ने इसे पुख्ता किया?
अपनी बिगडती दशा से परेशान बाल कटिंग की दुकान चलाने वाला जब देखो भगवान को कोसता रहता की इतनी पूजा पाठ के बाद ये तूने केसा हाल किया /
रोज रोज के ओल्मे मिलने से भगवान भी दुखी रहने लगा / अब भगवान परेशान हो चला तो उसने बाल कटिंग की दुकान चलाने वाले की समस्या का निदान करने की सोची और रूप बदल कटिंग कराने पहुच गया/ भगवान बाल कटा रहे हे और काटने वाला भगवान को कोसे जा रहा हे / भगवान ने उससे पूछा की भाई तुम भगवान को इतना कोसते क्यों हो / दूकान वाला दुगने वेग से बोलने लगा की इतनी पूजा पाठ करता हु पर वो मेरी सुनता नही हे सुध नही लेता हे /
ये बात सुनकर भगवान ने उसे दुकान के बाहर बेठे एक फटेहाल भिखारी दिखाया और बोले इसके बाल देखे तुमने / दुकान वाला बोला बहुत बड़े हे / भगवान ने पूछा तुमने काटे क्यों नही तो दुकानवाला बोला ये मेरे पास आया नही इसलिए काटे नही /
फिर भगवान बोले जब ये आया नही तो तुम तो जा सकते थे इसके पास कम से कम ये भला तो होता उसका /
फिर भगवान बोले अब तुम्हारे पास भी भगवान आये नही हे तो तुम्हारा केसे भला होता /
खुद पर लेकर सोचो तुम की ये फटेहाल भिखारी तुम्हारे पास आने की हालत में नही तो तुम जा सकते थे /
भगवान फिर बोले जेसा करोगे वेसा ही मिलेगा / इतना कहकर भगवान ने अपनी राह पकड़ी और दुकान वाला कोसना भूल उस फटेहाल की सुध लेने कुछ सोचता सोचता चल पड़ा /
Comments
Post a Comment