भूकम्प के झटके और किसान की मौत कुम्भ के मेले में बिछड़े भाइयो जेसे

आज के हालातों में भूकम्प के झटके और किसान की मौत कुम्भ के मेले में बिछड़े भाइयो जेसे लगते हे 
दोनों को ही हल्के में लिया जाता हे फिर कोई हल्ला नुक्सान होता हे तो डेमेज कंट्रोल का किसी ने किसी को जिम्मा दिया जाता हे /
दोनों ही बाते होने पर किसी की मौत पर शहनाई बजाने-बजवाने जेसा मक्कारी फेरब किया जाता हे / भूकम्प के झटकों की एसी तस्वीर पेश की जाती हे जेसे थाली में रखा भोजन बिना कुछ किये सीधे मुह में पहुच जाये /
घर खर्च चलाने के झटको के मुकाबले भूकम्प के झटके तो कुछ नही फिर भी खबरनवीस इतना हल्ला मचाते हे की अब तो मानो प्रलय से कोई नही बचेगा/
दहशत इतनी की डरने के बजाये लोग फ़ोन ले के अपने मिलने वालों को अपनी तस्वीर टीवी पर आने का संदेशा हंसते हंसते सुनाते हे /
बिल्डिंगो से जान बचाकर दीवारों के सहारे ऐसे खड़े होते हे की बिल्डिंग भले ही गिर जाए पर दीवार हिलेगी तक नही /
सुबह आये भूकम्प की दहशत शाम तलक बरकरार रखते हे /
इस दोरान भूकम्प के झटकों से केसे बचा जाए ये कोई नही बताता उल्टा डराता रहता हे /
जान बचाने वाले को कहा रुकने की फुर्सत रहती हे उसे तो हकीकत में केवल भागने की लगी रहती पर खबरनवीस तो भीड़ जमा करने में लगे रहते हे /
भूकम्प आसमान से तो टपकेगा नही तो भागने से क्या होगा ये कोई समझता समझाता नही /
बिल्डिंग गिरेगी तो धरती भी फट सकती हे इससे केसे बचे ये भी कोई बताता नही/ बस . भागो भागो का हल्ला मचाना हे /

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