बरसों पहले बनाये गये सविंधान की कुछ बातें वर्तमान में अनावश्यक

बरसों पहले आम नागरिको के हितो के लिए बनाये गये सविंधान की कुछ बातें वर्तमान में अनावश्यक सी होती जा रही हे / 
मसलन किसी पद या काम के लिए ली जाने वाली सत्य-निष्ठा की शपथ की पालना व निभाने में बड़ी मुश्किलाते होने लगी हे / मन मारकर इंसान सत्य निष्ठा की बाते करता हे मोका आते ही सेवा भाव के फेर में जल्द से भूल भी जाता हे / अगर अतिशीघ्र इसे कानूनन तरीके से लुप्त कर दिया जाए तो सिस्टम से जुड़े जिम्मेदारी लेके बेठे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी / ऐसा करते वक्त जनता की ना सोचना क्योंकि जनहित के जितने भी दावे इरादे बनाये गये हे वो पनपने से पहले ही मुरझाते देखे जा सकते हे /
विद्यालयों में या किसी काम के कागजों में वर्णित सच्चाई इमानदारी के हलफनामा से भी समय खराब व दिमाग की नसों पर असर पड़ता हे क्योंकि कोई भी काम बेईमानी की मिलावट के बिना होना देश में बड़ा मुश्किलों से भरा हे / 
बच्चा जन्मे या कोई मरे , विद्यालय में प्रवेश, नोकरी की मारामारी,शादी; तलाक,बिजली-पानी की जरूरत,बैंक, सरकारी-निजी कार्यालयों व जीवन यापन से सम्बन्धित कामों में नित रोज झूठ मक्कारी को सच बनाकर काम निकाला जाता हे /
अब इससे ज्यादा आप लोगों को जानना हे अपने सिस्टम कामों के बारे में तमाम सुख सुविधाये त्यागकर आम इंसान की भांति नेशनल परमिट 11 का उपयोग करे / 

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